चुड़ैल की हंसी | chudail ki hansi | Bhutiya Chudail Story

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चुड़ैल की हंसी | chudail ki hansi | Bhutiya Chudail Story:

रूहानी आवाजें अक्सर सुनसान इलाकों में ही सुनाई देती है, लेकिन हमारे बीच में कुछ ऐसे भी इंसान रहते हैं जो, किसी भी जगह पर बैठे बैठे, भूतों की आवाज़ सुन सकते हैं | चुड़ैल की हंसी ( chudail ki hansi ) एक ऐसी ही, कहानी ( Bhutiya Chudail Story ) है | एक व्यक्ति विश्वनगर गाँव में रहता था | पेशे से तो वह बढ़ई था, लेकिन गाँव में झाड़ फूंक का काम करने के लिए भी, लोग उसे बुलाया करते थे | लोगों का कहना था कि, बढ़ई को भूत बला की अच्छी जानकारी थी | एक बार बढ़ई, फ़र्नीचर बनाने के लिए लकड़ी लेने, जंगल निकल जाता है | जंगल में उसे एक सी एक क़ीमती लकड़ियाँ मिलती हैं | वह सभी को टुकड़ों में काट काटकर इकट्ठा करता जाता है | उसे ऐसा करते हुए शाम हो जाती है | बढ़ई सारी लकड़ियाँ अकेले नहीं ले जा सकता था, इसलिए वह लकड़ी के कुछ गट्ठरों को घने पेड़ों के बीच में छुपा देता है और एक गट्ठर उठाकर ले जाने लगता है, लेकिन तभी उसे किसी औरत के हँसने की आवाज़ सुनाई देती है | अचानक बढ़ई के सर से लकड़ी का गट्ठर गिर जाता है | बढ़ई पहले से भूतों के बारे में जानता था, इसलिए वह पल भर में समझ जाता है कि, यह किसी भयानक चुड़ैल की हंसी ( chudail ki hansi ) है | लेकिन शाम होने की वजह से, वह हावी हो सकती है, इसलिए अभी यहाँ से निकलना ही ठीक होगा और बढ़ई बिना लकड़ियों के, जंगल के रास्ते, दबे पाँव निकलने लगता है, लेकिन चुड़ैल की हंसी ( chudail ki hansi ) बढ़ई के कानों में गूंजती रहती है | बढ़ई डरा हुआ सा, अपने घर पहुँचता है |

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चुड़ैल की हंसी ( chudail ki hansi ) सुनाई न दे इसलिए, बढ़ई अपने कानों को ज़ोर से दबा रहा था लेकिन चुड़ैल की हंसी ( chudail ki hansi ) उसके दिमाग़ में बस चुकी थी | धीरे धीरे बढ़ई की चाल बदलने लगी | वह औरतों की तरह चलने लगा | चुड़ैल की हंसी ( chudail ki hansi ) के प्रभाव ने, उसे औरत बनने पर मजबूर कर दिया और कुछ ही दिनों के अंदर वह, पूरी तरह से अपने आपको औरत मानने लगा | एक रात वह साड़ी पहनकर, औरतों की तरह श्रृंगार करके, कुल्हाड़ी लेकर सड़क पर पहुँच जाता है | रास्ते से कई गाड़ियां गुज़रती रहती हैं और वह रोड के किनारे, पेड़ के नीचे औरत के भेष में, आने जाने वाली गाड़ियों को घूर रहा होता है | अचानक एक बाइक वाला आता है और बढ़ई, अपनी जगह से उठकर रोड पर आ जाता है और उसके सामने कुल्हाड़ी लेकर खड़ा हो जाता है | बाइक सवार सुनसान रास्ते में, एक औरत को खड़ा देख डर जाता है और लड़खड़ाकर रोड पर ही गिर जाता है | उसके गिरते ही, बढ़ई उसके पास पहुँचकर, उसके सीने में कुल्हाड़ी से कई वार करता है और देखते ही देखते, बाइक सवार की जान निकल जाती है | सड़क पर एक व्यक्ति की इतनी दर्दनाक मौत से, पूरे शहर में सनसनी फैल जाती है | जिस जगह पर हत्या हुई थी, उस जगह पर कोई CCTV कैमरा मौजूद नहीं था, जिससे क़ातिल का पता लगाना मुश्किल था | पुलिस एक एक करके सबूत ढूंढने में लगी थी | तीन दिन गुज़रते ही, रात को कुल्हाड़ी के वार से, दो व्यक्ति और सड़क पर मारे जाते हैं | पुलिस को लगने लगा था कि, यह किसी सीरियल किलर का काम है | लगातार हत्याओं से शहरवासियों को सड़क पर निकलने में भी डर लगने लगा था |

chudail ki hansi
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मामला बहुत पेचीदा होता जा रहा था | तभी पुलिस के हाथ, एक सुराग़ लगता है | मरने वाले तीनों व्यक्ति, एक दूसरे के रिश्तेदार निकलते हैं | पुलिस मरने वालों के परिवार से, पूछताछ करती है | दरअसल पुलिस को श़क होता है कि, हो सकता है, इनकी कोई ख़ानदानी दुश्मनी है, जिसकी वजह से ये हत्याएं हो रही हैं | तभी अगली रात, एक और व्यक्ति, अपनी कार सहित खाई में गिर जाता है और जब उसकी कार खाई से निकाली जाती है तो, पता चलता है कि, कार के कांच में, किसी ने पत्थर से वार किया था, इसलिए गाड़ी का बैलेंस बिगड़ गया और गाड़ी खाई में जा गिरी | इस हादसे में गाड़ी चालक की मौत हो गई | इत्तफ़ाक की बात तो यह थी कि, यह गाड़ी चालक भी, इन्ही तीनों का रिश्तेदार था | बढ़ई लगातार एक के बाद एक, हत्याएं करता जा रहा था, लेकिन उसके ऊपर किसी को श़क नहीं हो रहा था | चुड़ैल की हंसी ( churel ki hansi ) बढ़ई को अपने क़ब्ज़े में ले चुकी थी और अब वह, वही कर रहा था जो, चुड़ैल चाहती थी | पुलिस को एक बात तो समझ में आ जाती है कि, हत्याएं एक ही परिवार के लोगों की हो रही हैं | इसका मतलब उनके परिवार से किसी की दुश्मनी हैं, तभी इनका कोई दुश्मन, लगातार इन्ही के परिवार पर, हमला कर रहा है | अब पुलिस उस परिवार के सभी ऐसे रिश्तेदारों की सूची तैयार करती है जो, उस शहर में रह रहे होते हैं, ताकि उनको बचाने के लिए सुरक्षा दी जा सके और एक रात, बढ़ई कुल्हाड़ी लेकर जा रहा होता है, तभी एक व्यक्ति की नज़र उस पर पड़ती है | इतनी रात सुनसान सड़क पर, एक औरत को हथियार के साथ देखते ही, उसे श़क होता है और वह पुलिस को सूचना दे देता है | शहर में हत्यारे की तलाश चल रही होती है और इसी बीच पुलिस को एक संदिग्ध औरत की सूचना मिलती है | पुलिस तुरंत मौक़े पर पहुँच जाती है और बढ़ई को चारों तरफ़ से, घेरकर गिरफ़्तार कर लिया जाता है | गिरफ़्तारी के वक़्त, बढ़ई चुड़ैल की तरह हंसने लगता है | पुलिस को उस पर संदेह होता है, क्योंकि यह एक औरत नहीं बल्कि, आदमी है | बढ़ई को गाड़ी में बैठाकर, थाने ले जाया जाता है, लेकिन वह बहुत उग्र हो चुका था और ताक़त से, सभी पुलिस वालों को धक्का दे रहा था | दस दस पुलिस वाले, उसे क़ाबू में करने में लगे हुए थे | बढ़ई को हथकड़ी लगाकर बाँध दिया जाता है और जब उससे पुलिस पूछताछ करती है तो, वह अजीब से जवाब देता है | वह शक्ल से आदमी था, लेकिन वह अपने जवाब एक औरत की तरह दे रहा होता है |

चुड़ैल की हंसी
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पुलिस ऑफ़िसर को लगता है कि, शायद यह पागल है, इसलिए वह मानसिक रोग विशेषज्ञ को बुलाते हैं, ताकि उसके बारे में पता लगाया जा सके | मनोचिकित्सक आते ही बता देता है कि, यह पागल नहीं बल्कि, अपने अंदर किसी औरत को बैठा चुका है और अब यह एक अलग ही दुनिया की बातों को, सोचकर हत्याएं कर रहा है | पुलिस को मनोचिकित्सक का उत्तर, संतोषजनक नहीं लगता | अचानक एक हवलदार कहता है कि, हमें भूत भगाने वाले ओझा को भी बुलाना चाहिए | शायद इसके अंदर, कोई प्रेतात्मा आयी हो | पुलिस ऑफ़िसर, इन सब बातों पर यक़ीन नहीं करते, लेकिन केस को आगे बढ़ाने के लिए, कुछ न कुछ तो करना ही था | श्मशान से एक ओझा को, पुलिस की जीप में बैठाकर ले आया जाता है | ओझा आते ही बढ़ई के चेहरे में विभूति फेंकता है और बढ़ई तुरंत, सब कुछ बताने लगता है और आधे घंटे के अंदर ही, पुलिस को सारी कहानी समझ में आ जाती है | दरअसल तीन माह पहले, एक बस, बारात लेकर, सड़क से जा रही थी और रास्ते में, एक लड़की, उसी बस से टकरा जाती है और वह घायल हो जाती है | तभी बस में बैठे बाराती उतरकर, उसे अस्पताल पहुँचाने की वजह, वहीं किनारे जंगल में ले जाकर, एक गड्ढे में मरा हुआ समझकर, ज़िंदा ही दफ़ना देते हैं और यह वही लड़की की आत्मा है जो, बढ़ई के अंदर आकर, उन्हीं रिश्तेदारों को, एक एक करके मार रही है जो, उस बारात में शामिल थे | पुलिस को सारा मामला समझ में आ जाता है | पुलिस ओझा से कहती है कि, आप अपनी प्रक्रिया पूरी करिए और उस प्रेतात्मा को बढ़ई के शरीर से बाहर निकालिए | ओझा अपनी पूजा विधि के द्वारा, चुड़ैल को क़ाबू में कर लेता है |

चुड़ैल की हंसी
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ओझा, प्रेतात्मा को विश्वास दिलाता है कि, उसके साथ न्याय होगा, वह लोगों की हत्या करना बंद कर दें और इसी दौरान बढ़ई बेहोश हो जाता है और कुछ समय के बाद, जब उसे होश आता है तो, वह सामान्य बर्ताव करने लगता है | पुलिस उसी जंगल में जाकर, उस लड़की की लाश का पता लगाती है और एक एक करके, सभी रिश्तेदारों को हिरासत में लिया जाता है | बढ़ई के ऊपर, हत्याओं का इल्ज़ाम होता है, लेकिन बढ़ई को पूरी तरह दोषी नहीं पाया जाता है | उसे मानसिक रोगी मानते हुए, एक साल पागलखाने में, रहने का आदेश दिया जाता है और इसी के साथ चुड़ैल की हंसी ( churel ki hasi ) बढ़ई को सुनाई देना, हमेशा हमेशा के लिए बंद हो जाती है |

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